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3 मिनट पहले
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प्रियंका गांधी ने लोकसभा में 28 जुलाई को संसद में स्पीच दी थी- फाइल फोटो
देशभर के 215 वर्तमान और पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी को खुला पत्र लिखा है। इसमें प्रोफेसर वी कामकोटि के खिलाफ उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई है।
पत्र में कहा गया है कि किसी शिक्षाविद् पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करते समय तथ्यों और गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। आपके मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।
प्रियंका ने लोकसभा में गोमूत्र विशेषज्ञ कहा था

प्रियंका ने 28 जुलाई को लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर पर स्पीच दी।
प्रियंका ने कहा था- अध्यक्ष महोदय, आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय जी को आपके माध्यम से मैं कहना चाहती हूं कि शायद उन्हें अपने सलाहकार बदलने चाहिए। नई-नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा कि उनका अध्यक्ष चाहे कोई भी हो, राधाकृष्ण कमेटी भी व्यवस्था में सुधार लाने के लिए बनी थी, आज तक उसकी एक सिफारिश लागू नहीं हुई है। और इस नई कमेटी में तो… इस नई कमेटी में तो… एक एक्स-IB चीफ… एक एक्स-IB चीफ, एक IT कंपनी के मालिक और एक गोमूत्र के विशेषज्ञ भी हैं।
इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता जी? सर, सच है! आप आज मेरे से नाराज हो रहे हैं, बस मुस्कुरा लीजिए।
चिट्ठी में लिखी 5 बड़ी बातें…
- भारत की संसद हमेशा से ऐसा मंच मानी गई है, जहां विचारों पर बहस होती है, असहमतियां गरिमा के साथ व्यक्त की जाती हैं। किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके तर्कों की मजबूती के आधार पर किया जाता है, न कि उसका उपहास उड़ाकर।
- हमें आपके उस बयान पर निराशा है, जिसमें आपने IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को गोमूत्र विशेषज्ञ कहा। चाहे यह टिप्पणी व्यंग्य के रूप में की गई हो या राजनीतिक बयानबाजी के तहत। इससे कहीं व्यापक प्रभाव पड़ता है।
- कामकोटि भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों में से एक के प्रमुख हैं। हर शिक्षाविद की तरह उन्हें भी परिकल्पनाएं रखने, पारंपरिक ज्ञान पर चर्चा करने और वैज्ञानिक संवाद में भाग लेने का अधिकार है। किसी विद्वान के विचारों के सार पर चर्चा करने के बजाय उसे किसी लेबल से खारिज कर देना, उस वैज्ञानिक दृष्टिकोण को कमजोर कर सकता है।
- इतिहास बताता है कि अनेक ऐसे विचार, जिन्हें कभी असंभव या अविश्वसनीय माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हुए। कई व्यापक रूप से स्वीकार किए गए। विश्वास समय के साथ गलत साबित हुए और त्याग दिए गए।
- इतनी ही चिंता की बात यह भी है कि ऐसी टिप्पणियां भारत के शैक्षणिक और शोध समुदाय को क्या संदेश देती हैं। उनके तर्कों की आलोचना कीजिए, उनके साक्ष्यों को चुनौती दीजिए, प्रमाणों के हाई स्टैंडर्ड की मांग कीजिए, लेकिन उनकी विद्वत्ता और शोध को कमतर मत आंकिए।
अनुराग ठाकुर बोले थे- उनकी डिग्रियां गांधी परिवार के बराबर हैं

सांसद अनुराग ठाकुर ने 28 जुलाई को कहा था, प्रियंका गांधी गंभीर विषय पर भी अपने पुराने, जो इनकी सरकार के कुकर्म थे, जो खराब काम थे, उन पर पर्दा डालने का प्रयास करती हैं। मुझे दुख इस बात का है, उन्होंने एक वैज्ञानिक, IIT मद्रास के प्रोफेसर वी कामकोटि जी के बारे में जो टिप्पणी की है।
कामकोटि जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के फॉर्मर चेयरमैन हैं। RSS से होने का कोई गुनाह नहीं है, अगर होंगे भी तो उनको गर्व होना चाहिए कि वे RSS से हैं। आप भी जॉइन कर लीजिए। थोड़े संस्कार आ जाएंगे। देश के बारे में सोचना शुरू कर देंगे। अगर आप RSS के हो जाएंगे तो।

2025 में वायरल हुआ था कामकोटि का वीडियो
- 2025 में कामकोटि का एक वीडियो सामने आया था। इसमें वे दावा करते नजर आ रहे थे कि गाय का यूरिन यानी गोमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होता है। ये कई बीमारियों को ठीक कर सकता है। इन बीमारियों में IBS या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम भी शामिल है।
- आलोचनाओं के जवाब में कामकोटि ने कहा था- गोमूत्र के एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लैमेटरी गुणों को वैज्ञानिक तरीके से दिखाया गया है। USA की टॉप मैगजीन ने इसके साइंटिफिक प्रूफ पब्लिश किए हैं। लोगों की ये सोच गलत है कि गोमूत्र की मेडिकल प्रॉपर्टीज पर कोई ठोस एक्सपेरिमेंट या साइंटिफिक एविडेंस नहीं है।
प्रोफेसर ने 2021 में पब्लिश नेचर जर्नल का लेख दिखाया था
अपनी बात को साबित करने के लिए प्रो. कामकोटि ने जून 2021 में साइंस जर्नल नेचर में पब्लिश लेख शेयर किया था। इसमें नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के एनिमल बायोटेक्नोलॉजी सेंटर और सेल बायोलॉजी एंड प्रोटिओमिक्स लैब से जुड़े साइंटिस्ट्स ने ‘गाय के मूत्र में पेप्टाइड प्रोफाइलिंग के परिणाम’ पब्लिश किए थे।
- साइंटिस्ट्स ने निष्कर्ष निकाला था- गाय के मूत्र में हजारों एन्डोजिनस पेप्टाइड्स की डिस्कवरी के लिए सिंपल मेथड बताई गई है। ये गोमूत्र से जुड़ी अलग-अलग बायोएक्टिविटी में योगदान करते हैं।
- हमने ई. कोलाई और एस. ऑरियस के खिलाफ पेप्टाइड-मीडिएटेड एंटीमाइक्रोबियल एक्टिविटी के सबूत दिए हैं, लेकिन अन्य बायोएक्टिविटीज को मान्य करने के लिए और अधिक एक्सपेरिमेंट की जरूरत है।
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राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘मनुस्मृति’ बयान पर हंगामा हुआ। वे शैक्षणिक संस्थाओं पर RSS के दखल पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले बढ़ गए हैं, इससे शूद्र को पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। पढ़ें पूरी खबर…





