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दिल्ली सरकार ने ‘कचरे से कंचन’ और प्रदूषण मुक्त राजधानी के अपने विज़न की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली नगर निगम और देश की दिग्गज ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत दिल्ली के तेहखंड और ओखला क्षेत्र में कुल 800 TPD (टन प्रतिदिन) क्षमता वाले आधुनिक कंप्रेस्ड बायो-गैस प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे। कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगी नई दिशा मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुए इस MoU का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में रोजाना पैदा होने वाले गीले कचरे का वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण करना है। इन बायो-गैस प्लांट्स के चालू होने से न केवल गीले कचरे की प्रोसेसिंग सुगम होगी, बल्कि दिल्ली को एक ग्रीन और क्लीन एनर्जी (सीबीजी) का स्रोत भी मिलेगा। तेहखंड और ओखला में स्थापित होने वाले संयंत्रों की कुल क्षमता 800 TPD (टन प्रतिदिन) होगी। बायो-गैस प्लांट्स के निर्माण से कूड़े के पहाड़ों को हटाने और उनके आकार को तेज़ी से कम करने के अभियान को एक बड़ी गति मिलेगी। गीले कचरे से बायो-गैस बनने के कारण हवा में फैलने वाली दुर्गंध और मीथेन गैस के उत्सर्जन पर लगाम लगेगी। कचरे से तैयार होने वाली कंप्रेस्ड बायो-गैस का उपयोग वाहनों और उद्योगों में स्वच्छ ईंधन के रूप में किया जा सकेगा, जिससे पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी। दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने की प्रतिबद्धता इस अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल दिल्ली के सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को कूड़े के ढेरों से मुक्ति दिलाना और राजधानी के नागरिकों को एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है। एमसीडी और ऑयल इंडिया का यह संयुक्त प्रयास न केवल कचरा प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने में मददगार होगा, बल्कि यह सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा देगा।




