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दिल्ली में मानसून की दस्तक के साथ ही डेंगू का खतरा बढ़ने लगा है। विश्व डेंगू दिवस के मौके पर एम्स के विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा है कि डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर पहचान और रोकथाम है। लक्षणों को नजरअंदाज करने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक हर साल बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने के साथ डेंगू के मामलों में भी तेजी आती है। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में सितंबर से नवंबर के बीच डेंगू के मामलों में 60 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की जाती है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू की शुरुआत आमतौर पर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज पीड़ा, त्वचा पर लाल चकत्ते, जी मिचलाना और उल्टी जैसे लक्षणों से होती है। ऐसे संकेत मिलने पर खुद दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। एम्स के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, “डेंगू पूरी तरह से रोकथाम योग्य बीमारी है। घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।” ‘वन वर्ल्ड अगेंस्ट डेंगू’ थीम पर जागरूकता अभियान… इस वर्ष विश्व डेंगू दिवस 2026 की थीम ‘वन वर्ल्ड अगेंस्ट डेंगू’ रखी गई है। इसके तहत दिल्ली में स्वास्थ्य एजेंसियां और स्थानीय निकाय जलभराव रोकने, फॉगिंग कराने और ‘चेक, क्लीन एंड कवर’ अभियान के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। एम्स ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है। डेंगू से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां…




