Sanchar Saathi

भारत में टेलीकॉम-सिक्योरिटी को लेकर बड़ा बदलाव आया है। Department of Telecommunications (DoT) ने 28 नवंबर 2025 को एक निर्देश जारी किया है, जिसके अंतर्गत अब देश में बिकने वाले लगभग सभी नए स्मार्टफोन्स में पहले से Sanchar Saathi ऐप को प्री-इंस्टॉल (pre-install) करना अनिवार्य कर दिया गया है।

नीचे — इस आदेश के पीछे क्या है, किसका विरोध है, और आम इस्तेमालकर्ता के लिए इसका मतलब क्या हो सकता है — जानिए विस्तार से।

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नया आदेश: क्या Sanchar Saathi ऐप अब हर फोन में अनिवार्य होगा? — पूरी जानकारी 3

Sanchar Saathi — क्या है और क्या करती है?

  • Sanchar Saathi एक सरकारी साइबर-सिक्योरिटी ऐप है, जिसे मूल रूप से मोबाइल फोन से जुड़ी धोखाधड़ी (fraud), चोरी, फर्जी सिम/IMEI जैसी समस्याओं से निपटने के लिए बनाया गया है।
  • इसके ज़रिए आप:
    • किसी फोन का IMEI चेक कर सकते हैं, यह देखने के लिए कि वह फोन असली है या नकली / ब्लैकलिस्टेड है।
    • अगर आपका फोन चोरी या खो गया हो — तो उसे ब्लॉक या रिपोर्ट कर सकते हैं।
    • देख सकते हैं कि आपके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन (सिम) रजिस्टर्ड हैं — ताकि फर्जी सिम या धोखाधड़ी से बचा जा सके।
    • संदिग्ध कॉल/मैसेज या स्पैम की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

सरकार का कहना है कि इस तरह फोन — खासकर सेकेंड-हैंड या री-सेल — खरीदने वाले उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने में मदद मिलेगी।


नया आदेश: क्या बदला है 2025 में?

  • 28 नवंबर 2025 के आदेश में, DoT ने स्मार्टफोन कंपनियों — जैसे Apple, Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo आदि — को निर्देश दिया है कि वे 90 दिनों के भीतर अपने नए फोन में Sanchar Saathi ऐप को पहले से इंस्टॉल करें।
  • इसके साथ ही, जो फोन पहले से स्टॉक में थे या री-सेल के लिए जा रहे हैं, उन पर भी सॉफ़्टवेयर अपडेट (OTA) के ज़रिए यह ऐप जोड़ने को कहा गया है।
  • आदेश में यह भी है कि ऐप सेटअप के दौरान स्पष्ट दिखे — यानी फोन चालू होने पर उपयोगकर्ता को इसे देखने पाएँ।
  • आरंभ में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ऐप “नॉन-रिमूवेबल” यानी हटाया / डिसेबल नहीं किया जा सकेगा।

सरकार का तर्क: यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत में साइबर फ्रॉड, चोरी हुए फोन के री-सेल, फर्जी / क्लोन IMEI वाले फोन, धोखाधड़ी वाले सिम-कनेक्शन आदि मामलों में वृद्धि हुई है। Sanchar Saathi इन पर लगाम लगाने की दिशा में काम कर सकता है।


लेकिन विवाद किन बातों को लेकर है?

यह आदेश सिर्फ सकारात्मक नहीं है — इसके कई आलोचक और सवाल हैं:

प्राइवेसी और निजता (Privacy)

  • कई गोपनीयता और डिजिटल-राइट्स विशेषज्ञों का कहना है कि एक सरकारी ऐप जो पहले से हर फोन में इंस्टॉल हो — वो निजता के लिए खतरा हो सकता है।
  • वे सवाल उठाते हैं — अगर सरकार ने इसे अनिवार्य कर दिया, और उपयोगकर्ता द्वारा हटाने की इजाज़त नहीं होगी, तो क्या यह एक प्रकार की निगरानी (surveillance) नहीं होगी?

उपयोगकर्ता की आज़ादी (User Consent)

  • आदेश में शुरुआत में कहा गया कि ऐप रिमूवेबल नहीं होगा — इसके कारण उपयोगकर्ता की पसंद सवाल में आ गई।
  • कुछ कंपनियाँ — विशेष रूप से Apple — इस आदेश को स्वीकार नहीं करना चाहतीं। Apple के iOS पर ये ऐप जबरन जोड़ना, उनकी पॉलिसी के खिलाफ हो सकता है।

सरकार का सफाई बयान

  • विवाद के बीच, सरकार और उसके समर्थकों ने कहा है कि Sanchar Saathi सिर्फ एक सुरक्षा उपाय है — इसका उद्देश्य फोन चोरी, धोखाधड़ी और नेटवर्क दुरुपयोग को रोकना है, न कि निजी डेटा पर निगरानी।
  • साथ ही, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार — आदेश जारी करने के बाद — सरकार की ओर से कहा गया कि उपयोगकर्ता चाहें तो ऐप को अनइंस्टॉल (delete) कर सकते हैं।

क्या मतलब है ये आपके लिए — आम नागरिक की नज़र से

अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने वाले हैं, या री-सेल / सेकेंड-हैंड फोन लेने की सोच रहे हैं, तो अभी से कुछ बातें ध्यान देने लायक हो जाएँगी:

  • नए फोन के साथ Sanchar Saathi ऐप पहले से ही मौजूद आ सकता है — और हो सकता है कि उसे हटाना मुश्किल हो।
  • सेकेंड-हैंड फोन खरीदते समय — उसके IMEI का सत्यापन जरूर करें; ऐप के ज़रिए पता चलेगा कि फोन वैध है या ब्लैकलिस्टेड।
  • अगर चोरी या खो गया फोन है — तो Sanchar Saathi से मदद मिल सकती है।
  • लेकिन, अगर आप प्राइवेसी या डेटा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं — तो समझिए कि इस आदेश से आपकी डिजिटल निजता पर असर पड़ सकता है।

अलग-अलग दृष्टिकोण: फायदे vs चिंताएँ

पक्ष / दृष्टिकोणलाभ / दिक्कत / प्रश्न
सरकार / सरकार समर्थकसाइबर फ्रॉड, फोन चोरी, फर्जी सिम/IMEI से लड़ने में सुविधा; उपयोगकर्ता की रक्षा; फोन की प्रामाणिकता सुनिश्चित; सेकेंड-हैंड मार्केट को सुरक्षित बनाना.
उपयोगकर्ता (जहां सावधानी हो)फोन खरीदने से पहले IMEI सत्यापन; चोरी या खोने पर ब्लॉक/रिपोर्ट; फर्जी कॉल/मैसेज से सुरक्षा.
गोपनीयता व निजता समर्थक / नागरिक-स्वतंत्रता समूहजबरन प्री-इंस्टॉलेशन से निजी आज़ादी प्रभावित; डेटा संग्रहण व निगरानी की संभावना; उपयोगकर्ता की सहमति (consent) न लेना विवादित.
टेक्नोलॉजी निर्माता / कंपनियाँ (जैसे Apple)पॉलिसिस व प्लेटफार्म की आज़ादी पर असर; ग्राहकों में भरोसे की कमी; कानूनी व प्राइवेसी-नियमन चुनौती.

निष्कर्ष: कदम महत्वपूर्ण है, लेकिन सवाल भी गंभीर

Sanchar Saathi ऐप को हर फोन में अनिवार्य करना — यह कदम निश्चित रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक हो सकता है जो फोन चोरी, धोखाधड़ी या सेकेंड-हैंड फोन खरीदने से डरते हैं। IMEI वेरिफिकेशन, फोन ब्लॉकिंग, सिम/कनेक्शन सत्यापन — ये सुविधाएँ रोजमर्रा की ज़िंदगी में मददगार साबित हो सकती हैं।

लेकिन इससे जुड़ी निजता, उपयोगकर्ता की आज़ादी, डेटा-सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों जैसे विषयों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जब सरकार किसी ऐप को हर फोन में पहले से इंस्टॉल करती है — और उसे हटाना कठिन या असंभव बनाती है — तो यह सिर्फ तकनीकी निर्णय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और नागरिक-अधिकारों का विषय बन जाता है।

अगले कुछ हफ्तों व महीनों में देखना होगा कि —

  • कंपनियाँ (विशेषकर Apple जैसे) कितनी मजबूरी से इस आदेश का पालन करती हैं,
  • उपयोगकर्ता (ग्राहक) कैसे प्रतिक्रिया देते हैं — क्या वे ऐप इंस्टॉल करना स्वीकार करते हैं या विरोध करते हैं,
  • सरकार क्या स्पष्ट करती है कि ऐप किस तरह उपयोग होगा, डेटा कहाँ व कैसे स्टोर होगा, और क्या उपयोगकर्ता की सहमति (consent) को प्राथमिकता दी जाएगी,

अन्य विकल्प और सुरक्षा उपाय

IMEI / फोन वेरिफिकेशन + नेटवर्क-ब्लॉकिंग (बिना ऐप)

  • हर फोन का एक यूनिक 15-अंकों वाला CEIR (Central Equipment Identity Register) कोड — IMEI — होता है। फोन बेचने / खरीदने से पहले आप IMEI को #06# डायल करके जान सकते हैं।
  • अगर आप सेकंड-हैंड फोन ले रहे हैं — तो IMEI की वैधता CEIR या निर्माता/विक्रेता द्वारा देने वाली जानकारी से मिलाएं। अगर IMEI ब्लैकलिस्टेड/नकली मिले — फोन न खरीदें।
  • ऐसे मामलों में, अगर आपका फोन खो गया है, तो आप मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर या स्थानीय थाने में रिपोर्ट करके IMEI ब्लॉक कराने की कोशिश कर सकती/सकते हैं — यह ऐप न होतो भी संभव हो सकता है।

फ़ायदा: किसी ऐप पर निर्भर नहीं — केवल IMEI + नेटवर्क ब्लॉकिंग द्वारा सुरक्षा।सीमितता: यदि आप खुद IMEI जांच न करें, या ब्लॉकिंग न कराएँ, तो नुकसान संभव है।

कॉल/मैसेज ब्लॉकिंग और स्पैम सुरक्षा ऐप्स

कई लोकप्रिय तृतीय-पक्ष (third-party) ऐप्स / सेवाएं हैं, जो कॉल-स्पैम, धोखाधड़ी कॉल / मैसेज आदि से बचने में मदद करती हैं — खासकर जब आप अनचाहे / अज्ञात नंबर से कॉल प्राप्त करते हैं। उदाहरण:

  • Truecaller — कॉलर-आईडी + कॉल/मैसेज ब्लॉकिंग सुविधा देती है।
  • Hiya – Caller ID & Block, Showcaller, Mr. Number आदि अन्य वैकल्पिक ऐप्स भी उपलब्ध हैं।

फ़ायदा: यह ऐप्स कॉल/मैसेज-आधारित धोखों (spam, robocall, scam) से तुरंत बचाव देते हैं।<br>सीमितता: ये थर्ड-पार्टी ऐप्स होते हैं — भरोसे और प्राइवेसी के बारे में सावधानी चाहिए।

बचाव और सतर्कता (Safe habits) — ऐप पर निर्भर न रहकर

  • अपना IMEI नंबर कहीं नोट कर लें, और फोन खरीदते/बेचते समय IMEI और बॉक्स / बिल / रसीद की जाँच करें।
  • कभी भी संदिग्ध लिंक, असुरक्षित ऐड, अनजान वेबसाइट या अज्ञात कॉल पर सूचना न दें। बैंक/परिचित पूछताछ के दौरान सावधानी रखें।
  • अगर फोन खो जाए या चोरी हो जाए — तुरंत अपने सिम प्रदाता (operator) को inform करें, सिम ब्लॉक करवाएँ, IMEI चोरी की रिपोर्ट बनवाएँ।
  • किसी थर्ड-पार्टी ऐप को इंस्टॉल करते समय उसके permissions (अनुमतियाँ) ध्यान से पढ़ें — अनावश्यक permissions देने से बचें।

डिजिटल-सिक्योरिटी सेवाएँ एवं सरकारी पोर्टल्स (अगर मौजूद हों)

  • कई देशों/स्थानिक नेटवर्क में IMEI-ब्लॉकिंग और केंद्रीय डेटाबेस द्वारा चोरी या खोए फोन को ब्लैकलिस्ट करना संभव है — जैसे CEIR भारत में।
  • आप अपने मोबाइल नंबर और सिम-कनेक्शनों की जानकारी समय-समय पर चेक रखें, ताकि पता चले कि आपके नाम पर कोई फर्जी कनेक्शन तो नहीं है।
  • अगर आपको कॉल या मैसेज धोखा प्रतीत हो, तो संबंधित इंस्टैंट मैसेजिंग एप या बैंक / सेवा प्रदाता के ग्राहक सहायता केंद्र से संपर्क करें।

कौन-कौन सी सीमाएँ हैं — क्यों सिर्फ “अन्य विकल्प” पर्याप्त नहीं भी हो सकते

  • IMEI जाँच और ब्लॉकिंग तभी काम करती है, जब आप खुद सावधान हों और IMEI चेक करें। यदि भूल गए, तो धोखाधड़ी हो सकती है।
  • कॉल/मैसेज ब्लॉकिंग ऐप्स आपकी प्राइवेसी की गारंटी नहीं देते — कई ऐप्स विज्ञापन दिखाते हैं, और उनकी permissions (जैसे Contacts, SMS, कॉल डेटा) संवेदनशील हो सकती है।
  • सिर्फ IMEI ब्लॉक करना पर्याप्त नहीं है — अगर कोई आपका सिम पोर्ट कर ले या क्लोन सिम बना ले, तो आपको अतिरिक्त सतर्क रहना होगा।
  • हर समय “सुरक्षा” के लिए ऐप्स या सेवाओं पर निर्भर रहना — यह पूरी सुरक्षा नहीं देता; जिम्मेदारी आपके हाथों में भी है।

कोशिश: एक “सुरक्षा बॉक्स” — ऐप + आदत + जाँच + सतर्कता

असल में, सबसे अच्छा तरीका है कि आप ऊपर दिए गए विकल्पों को मिलाकर रखें — यानी सिर्फ एक उपाय पर भरोसा न करें, बल्कि:

  • IMEI वेरिफिकेशन + ब्लॉकिंग (अगर जरूरत हो)
  • कॉल/मैसेज-ब्लॉकिंग + स्पैम-रिपोर्टिंग ऐप्स
  • सतर्कता (कॉल/मैसेज/लिंक के प्रति सावधान रहना)
  • समय-समय पर सिम-कनेक्शन और फोन-स्थिति की जाँच

इस तरह, अगर किसी एक सुरक्षा उपाय में कमी भी हो — अन्य उपाय आपकी रक्षा कर सकते हैं।

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