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नई दिल्ली10 मिनट पहले
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नेजुएला में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले भारतीय नाविक राकेश चौहान (33) के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि भारत पहुंचने पर राकेश का जब दोबारा पोस्टमॉर्टम हुआ तो शरीर के सभी प्रमुख अंदरूनी अंग गायब मिले।
परिवार के मुताबिक, राकेश का दिमाग, फेफडे, दिल, लीवर नहीं थे। परिवार ने आरोप लगाया कि राकेश की कंपनी ने उन्हें नहीं बताया गया कि वेनेजुएला में राकेश का पोस्टमॉर्टम किया जा चुका था। वहीं, इस मामले में फेडरेशन ऑफ सीफेयरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया (FSUI) ने सवाल उठाए हैं।
यूनियन ने कहा कि शव को बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट दिए भारत भेज दिया गया और वेनेजुएला के अधिकारियों की ओर से भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। यूनियन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कंपनी ने पहले हादसा, फिर मौत की जानकारी दी
राकेश चौहान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले थे। वह पत्नी, छह महीने के बेटे, पिता और भाई के साथ मुंबई में रहते थे। उन्होंने नवंबर 2025 में मर्चेंट नेवी जॉइन की थी और वेनेजुएला में मरीन फिटर के तौर पर काम कर रहे थे।
परिवार के मुताबिक, 7 मई को कंपनी ने फोन कर बताया कि राकेश जहाज पर गिर गए हैं और उन्हें गंभीर चोटें आई हैं। अगले दिन परिवार से कहा गया कि उनके बचने की संभावना सिर्फ 5% प्रतिशत है। उसी शाम कंपनी ने उनकी मौत की सूचना दी। कंपनी का दावा था कि चक्कर आने से गिरने के बाद इलाज के दौरान हार्ट अटैक से उनकी मौत हुई।
भारत में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने पर हुआ खुलासा
राकेश का शव भारत पहुंचने के बाद डॉक्टरों की टीम ने उसका परीक्षण किया, लेकिन यह कहकर पोस्टमॉर्टम नहीं किया कि विदेश में पहले ही पोस्टमॉर्टम हो चुका है। परिवार ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
इसके बाद देवरिया के जिलाधिकारी मधुसूदन हुलगी के निर्देश पर दूसरा पोस्टमॉर्टम कराया गया। परिवार के अनुसार, जांच में पता चला कि राकेश के शरीर से मस्तिष्क, हृदय, लीवर, फेफड़े, दोनों किडनी, प्लीहा, अग्न्याशय, पित्ताशय, आंतें, मूत्राशय और कई अन्य अंदरूनी अंग गायब थे। विसरा भी नहीं मिला, इसलिए मौत की सही वजह का फोरेंसिक परीक्षण संभव नहीं हो सका।
शरीर पर 22 टांके भी मिले
दूसरे पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट के मुताबिक, राकेश के शरीर पर गर्दन से जघन क्षेत्र तक और एक कान से दूसरे कान तक कुल 22 टांके लगे हुए थे। परिवार का कहना है कि उन्हें इस बारे में भी पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
FSUI ने उठाए कई गंभीर सवाल
FSUI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में पूछा कि परिवार की सहमति के बिना राकेश के शरीर से सभी महत्वपूर्ण अंग क्यों निकाले गए। यूनियन ने सवाल किया कि परिवार को तब तक अंधेरे में क्यों रखा गया, जब तक उन्होंने भारत में दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग नहीं की।
यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि शव प्राप्ति की रसीद में पत्नी रंजना चौरसिया की जगह ‘अंजना चौरसिया’ के नाम से हस्ताक्षर दर्ज किए गए। इसके अलावा रोजगार अनुबंध में जिस जहाज का नाम था, राकेश की तैनाती उससे अलग जहाज पर दिखाई गई। यूनियन का कहना है कि ये सभी बातें मामले में गड़बड़ी और संभावित साजिश की ओर इशारा करती हैं।
परिवार ने जांच और मुआवजे की मांग की
राकेश के परिवार ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने मौत से जुड़ी अहम जानकारी छिपाई। परिवार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच, दोषियों पर कार्रवाई और आर्थिक मुआवजे की मांग की है।
राकेश की मां की कोविड के दौरान मौत हो गई थी। परिवार ने उन्हें नौकरी के लिए वेनेजुएला भेजने में लाखों रुपये खर्च किए थे। उनकी पत्नी रंजना अपने छह महीने के बेटे के साथ मायके में रह रही हैं और लगातार भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। उन्होंने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। FSUI ने भी कहा कि नाविकों की जान और सम्मान के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।





