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नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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निर्वाचन आयोग घर-घर जाकर वोटरों की पहचान करने के अंतिम दौर में पहुंच रहा है। अब बचे हुए 39 करोड़ 73 लाख वोटर्स के दरवाजे पर दस्तक देने की तैयारी है।
इस बीच भास्कर ने पड़ताल की कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद मतदाता फोटो पहचान कार्ड यानी एपिक में क्या बड़े बदलाव आए हैं। SIR के बाद अब तक तैयार 59 करोड़ मतदाताओं के फोटो न सिर्फ हाल ही के हैं बल्कि रंगीन भी हैं।
चुनाव आयोग के 9 लाख 20 हजार से ज्यादा बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) ने मोबाइल से वोटरों के फोटो उनके पहचान पत्र के साथ जोड़कर मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाया है। इसके लिए BLO ने कोई फीस नहीं ली।
इसके अलावा, अब किसी भी वोटर का मकान नंबर ‘00’ दर्ज नहीं होगा, बल्कि सटीक पता लिखा जाएगा। SIR पूरा होने के बाद एक से ज्यादा जगह नाम रखना अपराध माना जाएगा। अब तक एएसडीडी कैटेगरी के तहत 2.6 लाख डुप्लीकेट वोटर आईडी हटाए जा चुके हैं।

जन-भागीदारी और SIR को लेकर जागरूकता के लिए बरहमपुर में सैंड आर्टिस्ट महेश्वर साहू ने सैंड आर्ट बनाया था। इन्हें सम्मानित भी किया गया।
पहले कार्ड में फोटो नहीं थे, या फिर बहुत धुंधले
पहले दौर में बिहार और सेकेंड फेज के 12 राज्यों के वोटर्स की घर-घर जाकर पुष्टि के बाद 59 करोड़ वोटरों के नए पहचान पत्र बने हैं। इनमें सबसे बड़ा बदलाव कार्ड की फोटो का है। पहले के करीब 30% वोटर कार्ड में फोटो थे ही नहीं। किसी में तो इतने धुंधले थे कि पहचानना मुश्किल था।
वजह ये कि संविधान में फोटो आईडी कार्ड का जिक्र ही नहीं है। ऐसे में फोटो के लिए मतदाता को बाध्य नहीं किया जा सकता था। पड़ताल से पता चला कि करीब 30 करोड़ फोटो नदारद, धुंधले, पुराने या पहचान से परे थे। जो फोटो थे वे 20-30 साल पुराने थे।

7 सवाल-जवाब में जानिए SIR से क्या फर्क पड़ा…
- SIR अभियान से मतदाता सूची में क्या बदल गया?सबसे अहम बदलाव यह है कि अब कोई भी मतदाता एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में अपना नाम दर्ज नहीं रख पाएगा। इस अभियान के तहत मतदाताओं को अपना मौजूदा निवास स्थान चुनने की पूरी छूट दी गई और बाकी सभी पुरानी जगहों से उनके नाम हटा दिए गए हैं।
- कोई ज्यादा जगहों पर नाम दर्ज रखता है, तो क्या?आयोग ने इसके लिए सख्त हिदायत दी है। SIR के दौरान सभी को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया गया था। इसके बावजूद अगर किसी का नाम एक से ज्यादा जगह पर दर्ज मिलता है, तो इसे अब गंभीर अपराध माना जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।
- फर्जी और दोहरे वोटरों की पहचान के लिए क्या कैटेगरी है?इसके लिए आयोग ने ‘एएसडीडी’ कैटेगरी बनाई है। इसका पूरा नाम ‘अबसेंट, शिफ्टेड, डुप्लीकेट, डिसीज्ड’ है। इसके तहत उनकी पहचान की जाएगी जो या तो मौजूद नहीं हैं, दूसरी जगह चले गए, जिनके पास दोहरे कार्ड हैं या जिनकी मौत हो चुकी है।
- अब तक कितने डुप्लीकेट कार्ड हटाए जा चुके हैं?इसके परिणामस्वरूप अब तक मतदाता सूची से 2.6 लाख डुप्लीकेट एपिक नंबर पूरी तरह से हटाए जा चुके हैं।
- संदिग्ध वोटर्स को पकड़ने के लिए क्या तकनीक?इसके लिए चुनाव आयोग ने ‘फोटो सिमिलर इलेक्टोर’ और ‘डेमोग्राफिकली सिमिलर इलेक्टोर’ जैसे बेहद एडवांस एनालिटिक सॉफ्टवेयर टूल्स का इस्तेमाल किया है, जो हूबहू मिलने वाले रिकॉर्ड्स को तुरंत पकड़ लेते हैं।
- चुनावों में मतदान प्रतिशत पर क्या असर पड़ेगा?लिस्ट से मृतकों, गैर-मौजूद और फर्जी मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, इसलिए अब वास्तविक और सक्रिय मतदाता ही रिकॉर्ड में बचे हैं। इससे आने वाले चुनावों में मतदान का प्रतिशत ज्यादा सटीक और बढ़ा हुआ दिखाई देगा।
- उम्मीदवारों के लिए ये किस प्रकार मददगार होगी?केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी जो सचमुच वहां निवास करते हैं। असली वोटर्स की सही लिस्ट मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट कह चुका- SIR अवैध नहीं; चुनाव आयोग शर्तों के साथ नागरिकता जांच सकता है

जून 2025 में बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया अब तक 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है। इस दौरान 7.41 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ नाम उत्तर प्रदेश से कटे।
SIR के तीसरे फेज 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश कवर होंगे। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। बिहार के बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी SIR कराया गया, जबकि असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ।
बिहार SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं से ही मामला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। मई 2026 में एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को वैध और संवैधानिक करार दिया।
CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा था कि SIR मनमाना नहीं है। चुनाव आयोग को यह प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। पढ़ें पूरी खबर…
3 राज्यों-UT को छोड़कर पूरे देश में पूरा होगा SIR
भारत में SIR करीब 21 साल बाद हो रहा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इससे पहले देशभर में ऐसा बड़ा अभियान 2002 से 2004 के बीच चला था। चुनाव आयोग ने बताया था कि देश में SIR की प्रक्रिया आठवीं बार हो रही है।
30 दिसंबर को खत्म होने वाले SIR के तीसरे फेज के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में SIR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। तीनों बचे हुए राज्यों में खराब मौसम और जनगणना के कारण SIR के शेड्यूल की घोषणा बाद में की जाएगी।
तीसरे फेज में SIR वाले राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा वोटर हैं। दादरा और नगर हवेली एवं दमन-दीव में वोटरों की संख्या सबसे कम है।
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19 राज्य-UT में SIR शुरू, यहां 37 करोड़ वोटर्स: 30 मई से 23 दिसंबर के बीच होगा वेरिफिकेशन; पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल चुनाव

चुनाव आयोग ने हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की है। यह SIR का तीसरा फेज होगा। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटर्स का वेरिफिकेशन होगा। पूरी खबर पढ़ें…



