VHP अध्यक्ष के पत्र पर संजय सिंह का पलटवार:राम मंदिर चढ़ावा विवाद; बोले- आलोक कुमार चोरों को बचा रहे


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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह ने विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के पत्र पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि आलोक कुमार राम मंदिर के चढ़ावा चोरों को बचा रहे हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो उनके पत्र में राजनीति नहीं होती है। उन्होंने अपने पत्र में भाजपा, आरएसएस और वीएचपी के उन लोगों का नाम नहीं लिखा है, जिन्होंने अपनी आंखों से चोरी होते देखा है। मंदिर निर्माण का कार्य देख रहे नृपेंद्र मिश्रा ने तो कई बार कहा कि मंदिर में सिर्फ चोरी नहीं, डकैती हुई है, लेकिन पत्र में उनका भी नाम नहीं है। 5 साल तक अनजान बने रहे संजय सिंह ने कहा कि इन सब के बाद भी आलोक कुमार के पत्र का स्वागत है। मैं जांच में शामिल होने को तैयार हूं। मैं अपने साथ उन्हें भी लेकर जाऊंगा, जो दान में दिए पदुकाएं, हार, राम चरित मानस चोरी होने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2021 में ही मैं अयोध्या कोतवाली में तहरीर देकर जमीन खरीद घोटाले की जांच की मांग की थी, लेकिन 5 साल तक आलोक कुमार अनजान बने रहे। ऐसे में जांच अधिकारी को आलोक कुमार से भी पूछताछ करनी चाहिए कि सार्वजनिक बयान देने वालों के नाम पत्र में क्यों नहीं दिए? अब सोमवार को मैं जांच अधिकारी को एक पत्र लिखूंगा और राम मंदिर ट्रस्ट में केंद्र के प्रतिनिधि रहे ज्ञानेश कुमार से पूछताछ करने की मांग करूंगा। पूर्व गृह सचिव को नहीं मिली रसीद संजय सिंह ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या में चंदा चोरी मामले की जांच कर रहे डीएसपी व जांच अधिकारी को एक चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और अन्य नेताओं से पूछताछ की जाए। उन्होंने कहा कि वहां चोरी कई प्रकार की हुई है। धन की चोरी, जमीन के नाम पर चोरी, आभूषणों की चोरी और मंदिर निर्माण में 40-40 फीसद कमीशन खाने की बात है। इसके अलावा प्रभु श्री राम की पादुका, हार और शिलाएं तक चोरी हो गई हैं। एक पूर्व गृह सचिव का भी बयान आया कि एक किलो सोने से लिखी गई पवित्र राम चरित मानस भी चोरी हो गई है और उसका भी कुछ पता नहीं है। पूर्व गृह सचिव बार-बार अनुरोध करते रहे, लेकिन अब तक उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं मिली। जमीन माफिया गैंग में सदस्य और मेयर शामिल संजय सिंह ने कहा कि इतने सब कुछ के बावजूद खुद को दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू संगठन कहने वाले विश्व हिंदू परिषद और उसके अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार इन सारे मामलों से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं और उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वे आज डीएसपी को पत्र लिख रहे हैं, जबकि मैंने तो वर्ष 2021 में ही अयोध्या की कोतवाली में बाकायदा तहरीर दी थी कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी से 2 करोड़ रुपए की जमीन महज 5 मिनट के अंदर 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। इस जमीन माफिया गैंग में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और तत्कालीन भाजपा मेयर ऋषिकेश उपाध्याय भी शामिल थे। मैंने ये सारे कागजात सौंपे थे, लेकिन आलोक कुमार 5 साल तक उन कागजातों से अनजान बने रहे। संपूर्ण प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराया संजय सिंह ने कहा कि आलोक कुमार इस बात से भी अनभिज्ञ हैं कि 9 और 12 जून को आम आदमी पार्टी ने नहीं, बल्कि भाजपा के ही नेता और पूर्व मीडिया प्रभारी डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को काफी विवरण के साथ चिट्ठियां लिखी थीं। संजय सिंह ने कमल के निशान वाला पत्र दिखाते हुए बताया कि भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री से मांग की थी कि इस पूरे प्रकरण की ईडी और सीबीआई से जांच कराई जाए। साथ ही दान राशि के संग्रहण, गणना, परिवहन और बैंक में जमा करने की संपूर्ण प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराया जाए। वेबसाइड बनाकर सार्वजनिक किया जाए अभिलेख डॉ. रजनीश सिंह ने अपने पत्र में लिखा था कि यदि किसी व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की थी कि यह मामला एक दिन का नहीं है, इसलिए शुरुआत से ही जमीन की खरीद-फरोख्त, मंदिर निर्माण के प्रशासनिक व्यय और अन्य मदों में खर्च की गई राशि की मदवार जांच कराई जाए। साथ ही सभी ऑडिट रिपोर्ट, लेखा परीक्षण और वित्तीय निरीक्षण संबंधी अभिलेखों को वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन और सार्वजनिक किया जाए। संजय सिंह ने आलोक कुमार से कहा कि यह सारा पत्र मैंने नहीं, बल्कि खुद भाजपा नेता ने लिखा था, लेकिन आलोक कुमार को इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। वर्तमान में एसआईटी जांच चल रही संजय सिंह ने बताया कि भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह के पत्र पर प्रधानमंत्री मोदी ने संज्ञान लिया और प्रधानमंत्री कार्यालय ने अयोध्या के जिलाधिकारी को पत्र लिखा। इसके जवाब में अयोध्या के एडीएम इंद्रकांत द्विवेदी ने लिखा कि डॉ. रजनीश सिंह द्वारा 12 जून को प्रधानमंत्री को दी गई ऑनलाइन शिकायत के संदर्भ में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव से वांछित सूचना मांगी गई थी। ट्रस्ट की ओर से अवगत कराया गया कि वर्तमान समय में एसआईटी जांच चल रही है और सभी सूचनाएं उनके द्वारा संकलित की जानी हैं, इसलिए इस स्तर पर ट्रस्ट से कोई भी सूचना मिल पाना संभव नहीं है। पीएम कार्यालय को जानकारी देने से इनकार संजय सिंह ने आलोक कुमार से पूछा कि क्या उन्हें इस बात की भी जानकारी नहीं है कि जब जिलाधिकारी कार्यालय ने बताया कि प्रधानमंत्री ने डॉ. रजनीश सिंह के पत्र पर जानकारी चाही, तो ट्रस्ट ने यह कहते हुए जानकारी देने से साफ मना कर दिया कि एसआईटी जांच चल रही है। ट्रस्ट ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय को कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। मंदिर में सिर्फ चोरी नहीं, डकैती हुई संजय सिंह ने कहा कि आलोक कुमार ने पत्र लिखने में भी बेईमानी कर दी। उन्हें अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और प्रो. रामगोपाल यादव का नाम तो याद रहा, लेकिन वे नृपेंद्र मिश्रा का नाम भूल गए। नृपेंद्र मिश्रा जो ट्रस्ट में प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण का कार्य देखते हैं, उन्होंने एक नहीं बल्कि कई इंटरव्यू में स्पष्ट कहा है कि राम मंदिर में सिर्फ चोरी नहीं हुई है, डकैती हुई है। आलोक कुमार ने उनका नाम क्यों नहीं लिखा और नृपेंद्र मिश्रा से पूछताछ क्यों नहीं होनी चाहिए? वे तो ट्रस्ट के एक सम्मानित और निर्माण कार्य देखने वाले व्यक्ति हैं। जब वे खुद कह रहे हैं कि डकैती हो रही है, तो उनका नाम पत्र में क्यों नहीं लिखा गया। मंदिर बनवाने में 40 फीसद कमीशन संजय सिंह ने कहा कि पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार कह रहे हैं कि वहां चोरी, बेईमानी और भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन उनका नाम भी आलोक कुमार ने नहीं लिखा कि उनसे पूछताछ होनी चाहिए। मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे महंत धर्मदास ने भी वहां चोरी और भ्रष्टाचार होने की बात कही है, लेकिन उनका नाम भी पत्र में नहीं है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने भी कहा कि वहां चोरी और भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन उनका नाम भी पत्र से गायब है। इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने आरोप लगाया कि अनिल मिश्रा मंदिर बनवाने में 40 फीसद कमीशन खाते थे, लेकिन उनका नाम भी पूछताछ के लिए नहीं लिखा गया। चोरों को बचाने का काम कर रहे आलोक संजय सिंह ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस के ही व्यक्ति महिपाल सिंह ने सार्वजनिक बयान दिया था कि वर्ष 2020-21 में ही उन्होंने बता दिया था कि मंदिर के चढ़ावे में चोरी हो रही है। उन्होंने इसकी जानकारी गोपाल राव को दी, गोपाल राव ने चंपत राय को बताया और फिर चंपत राय ने उल्टा महिपाल सिंह को ही निकालकर बाहर कर दिया। संजय सिंह ने आलोक कुमार से पूछा कि महिपाल सिंह का नाम पत्र में क्यों नहीं लिखा गया। इसका सीधा मतलब यह है कि आलोक कुमार चोरों को बचाने का काम कर रहे हैं। पूछताछ तो खुद आलोक कुमार से होनी चाहिए कि उन्होंने सार्वजनिक बयान देने वाले इन प्रत्यक्षदर्शियों के नाम जांच अधिकारी को क्यों नहीं दिए ताकि इन्हें बुलाकर पूछताछ की जा सके। श्री राम की पादुकाएं और हार चोरी संजय सिंह ने कहा कि इसके बावजूद मैं आलोक कुमार के पत्र का स्वागत करता हूं और अयोध्या के जांच कर रहे डीएसपी से कहना चाहता हूं कि वे मुझे बुलाएं। मेरी सुबह से बहुत सारे लोगों से बातचीत हो चुकी है और मैं सभी से संपर्क करके उन सबको अपने साथ ले जाऊंगा। मैं उन लोगों को भी ले जाऊंगा जो कह रहे हैं कि उनकी 60 किलो और 200 किलो चांदी चोरी हो गई है। जो कह रहे हैं कि प्रभु श्री राम की पादुकाएं और हार चोरी हो गए हैं। मैं पूर्व गृह सचिव को भी ले जाने का प्रयास करूंगा, जो कह रहे हैं कि एक किलो सोने से जड़ी पवित्र राम चरित मानस चोरी हो गई है। मैं संतोष दुबे से भी बातचीत करके उन्हें ले जाऊंगा, जो कह रहे हैं कि चांदी की प्राण-प्रतिष्ठित राम शिलाएं और मॉरीशस से आई एक बहुमूल्य राम शिला भी चोरी हो गई है। पत्र में बेईमानी साफ तौर पर दिख रही संजय सिंह ने आलोक कुमार से कहा कि उन्होंने पत्र लिखकर अच्छा किया, लेकिन उनके पत्र में बेईमानी और उनके मन का चोर साफ तौर पर दिख रहा है। उन्होंने उन लोगों के नाम जानबूझकर नहीं लिखे जो वास्तव में मंदिर की व्यवस्था में शामिल थे, जो अपनी आंखों से देख रहे थे कि वहां रोजाना चोरी का कार्य चल रहा है और जिनके पास इसके पुख्ता साक्ष्य और प्रमाण मौजूद हो सकते हैं। 20 लाख की जमीन 2.5 करोड़ में खरीदी संजय सिंह ने बताया कि लोगों को लग रहा था कि यह मजाक है, लेकिन जैसे ही एसआईटी ने मुझे बुलाया, मैं 13 महत्वपूर्ण दस्तावेज वहां देकर आ चुका हूं। मेरे पास और भी नए दस्तावेज आ गए हैं, जिनका मैं जल्द ही खुलासा करूंगा। इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। पूरे देश को पता चल जाएगा कि 2 करोड़ रुपए की जमीन 18.5 करोड़ में, 9 करोड़ की जमीन 55 करोड़ में और नजूल की जमीन 24 करोड़ में खरीदने वाले चंपत राय अभी भी जेल से बाहर कैसे हैं। 92 लाख की जमीन को 5 करोड़ 60 लाख में खरीदा। तत्कालीन भाजपा मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे दीप नारायण से 20 लाख की जमीन 2.5 करोड़ में खरीदी गई और जो जमीन दीप नारायण को मुफ्त में मिली थी, उसे 1 करोड़ में खरीदा गया। चंपत राय का केवल महासचिव पद से इस्तीफा संजय सिंह ने कहा कि ये तमाम कागजात एसआईटी को देने के बावजूद बड़े अफसोस की बात है कि अभी भी लीपापोती चल रही है। कहा जा रहा है कि चंपत राय ने केवल महासचिव पद से इस्तीफा दिया है, अभी ट्रस्ट से इस्तीफा नहीं दिया है। भारत के प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और पूरी चंदा चोर पार्टी भाजपा इस पूरे चंदा चोरी प्रकरण में मजबूती के साथ चोरों के बचाव में खड़ी है। जांच अधिकारी को एक पत्र लिखूंगा संजय सिंह ने एलान किया कि मैं भी सोमवार को जांच अधिकारी को एक पत्र लिखूंगा और मांग करूंगा कि चार साल तक ट्रस्ट के सदस्य के रूप में केंद्र सरकार और मोदी जी के प्रतिनिधि रहे ज्ञानेश कुमार से भी पूछताछ होनी चाहिए, क्योंकि ये सारी खरीद-फरोख्त उनकी पूरी जानकारी में हुई है। मैं पत्र में उन सभी लोगों के नाम लिखूंगा, जिन्हें आलोक कुमार अपनी चिट्ठी में भूल गए हैं या जिनके बारे में वे गजनी मोड में चले गए हैं। मैं तहरीर देकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जिक्र भी करूंगा। आनन-फानन में राम फकीर मंदिर तुड़वाया संजय सिंह ने बताया कि अभी यह जानकारी सामने आ रही है कि चंपत राय ने आनन-फानन में राम फकीर मंदिर ही पूरा तुड़वा दिया है। मैं इसकी गहनता से जानकारी जुटाकर इस विषय को भी मजबूती से सामने रखूंगा। उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली यह धमकी और पत्र लिखकर बंदर घुड़की देने का प्रयास आम आदमी पार्टी के साथ बिल्कुल नहीं चलेगा।

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