Comp 14617678570721771526958 1776938840


]

नई दिल्ली/कोलकाता3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
कोलकाता में 8 जनवरी को I-Pac डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर Ed रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं। - Dainik Bhaskar

कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन I-PAC रेड मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई जारी है। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं।

बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोक्ट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक पार्टी कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की।

जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कल कहा था कि जब कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच में दखल देता है, तो इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं कहा जा सकता।

दरअसल 8 जनवरी को ED ने कोलकाता स्थित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापा मारा था। इस दौरान ममता वहां पहुंचीं और कुछ फाइलें लेकर चली गईं। इसके बाद ED जांच में बाधा डालने के आरोप में ममता और बंगाल पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

Normal Text Quote 7 1776857655

ममता की 4 दलीलें

  • ममता की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखी। उन्होंने कहा- ED को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह सिर्फ उनका काम है, अधिकार नहीं।
  • ED का अधिकारी जब काम कर रहा है, तो वह सिर्फ ‘सरकारी कर्मचारी’ है। वह अपने विभाग से अलग किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता।
  • ED ने कहा कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ। ऐसा नहीं है, क्योंकि अधिकारी सिर्फ ड्यूटी निभा रहा है, मौलिक अधिकार का सवाल ही नहीं उठता।
  • ईडी खुद एक ताकतवर एजेंसी है वह खुद को ‘जनता का रक्षक’ बताकर कोर्ट में नहीं आ सकती।

सुप्रीम कोर्ट के 4 कमेंट

  • यह असल में किसी एक व्यक्ति का काम है। इसे पूरे सिस्टम या लोकतंत्र का विवाद बताना सही नहीं।
  • संविधान बनाते समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक मुख्यमंत्री किसी जांच एजेंसी के दफ्तर में पहुंच जाएगा।
  • सिर्फ कानूनी सिद्धांत से काम नहीं चलेगा। हमें जमीन की हकीकत भी देखनी होगी।
  • संविधान की व्याख्या समय के साथ बदलती रहती है। हर नए हालात में कोर्ट को नए सिरे से सोचना पड़ता है।

ऐसे समझें… तृणमूल के लिए I-PAC इतनी जरूरी क्यों

  • 2021 के चुनाव में: ममता के लिए I-PAC ने रणनीति बनाई। उन्होंने फर्म को संगठन का काम दिया। प्रत्याशी चयन, बूथ लेवल मैनेजमेंट, भाषण, सोशल पोस्ट, पोस्टर, नारे सब कुछ I-PAC ही कर रही थी।
  • इस चुनाव में: टीएमसी डेटा पर फोकस कर रही है। 2021 विस और 2024 लोकसभा चुनाव के बूथ स्तरीय आंकड़ों का विश्लेषण I-PAC ने ही किया।
  • हर सीट को 3 कैटेगरी में बांटा: मजबूत, कमजोर और लो वोट मार्जिन। 15 हजार तक मार्जिन की सीटें चुनीं।
  • टीम एसआईआर को भी ट्रैक कर रही है: पार्टी का मानना है कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटने से गणित बिगड़ सकता है, इसलिए शैडो एजेंट्स लाए गए।
  • ये एजेंट्स नाम कटने वाले वोटरों तक पहुंचे: उनसे फार्म भरवाए, री-एंट्री करवाई। बीएलओ को ट्रैक करना, वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पकड़ना, फील्ड से रियल टाइम इनपुट देना, ये काम शैडो एजेंट्स ही कर रहे थे।
  • हर सीट पर अलग वॉर रूम है: जहां 20 सदस्यीय टीम काम करती है। छोटी बैठकें अरेंज करती है।

I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस

I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी।

पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था।

12 61767863660 1776740038

खबरें और भी हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

×