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जम्मू मंडल के पठानकोट रेलवे स्टेशन से बेहद भावुक और सराहना योग्य मामला सामने आया है। यहां टिकट चेकिंग स्टाफ की सूझबूझ, मुस्तैदी और मानवीय संवेदनाओं के कारण एक 3 वर्षीय मासूम बच्चा, जो अपने माता-पिता से बिछड़ गया था, सकुशल अपने परिवार से मिल सका। रेलवे कर्मियों की इस सजगता ने न केवल एक परिवार को बिखरने से बचाया, बल्कि समाज में इंसानियत की एक नई मिसाल पेश की है।
दरअसल, दिल्ली-पठानकोट एक्सप्रैस ट्रेन में अपने माता-पिता से अलग हो चुके एक 3 साल के मासूम बच्चे को रेलवे कर्मचारियों ने सुरक्षित ढूंढ निकाला और उसके परिवार को सौंप दिया। दिल्ली का रहने वाला परिवार जम्मू जा रहा था। बच्चे को सकुशल देख माता-पिता की जान में जान आई।
दिल्ली पठानकोट एक्सप्रैस में रो रहा था बच्चा
यह घटना 5 जून की है। दिल्ली-पठानकोट स्पैशल 22429 के भीतर यात्रियों की भारी भीड़ थी। ट्रेन में तैनात टिकट चेकिंग स्टाफ ड्यूटी पर था। ट्रेन के कोच संख्या D-1 में टिकट चेकिंग स्टाफ के सदस्य आशीष कुमार टिकटों की जांच कर रहे थे। तभी उनकी नजर एक सीट पर पड़ी, जहां एक महज 3 साल का छोटा बच्चा अकेला बैठा बुरी तरह रो रहा था और डरा-सहमा हुआ था।
आशीष कुमार ने तुरंत स्थिति को भांपा और बच्चे के पास जाकर उसके माता-पिता के बारे में आसपास के सह-यात्रियों से पूछताछ की। जब यात्रियों ने बताया कि इस बच्चे के साथ यहां कोई नहीं है, तो मामला साफ हो गया कि बच्चा अपने परिवार से बिछड़ चुका है।
बिना वक्त गंवाए टीम को किया गया अलर्ट
आशीष कुमार जानते थे कि चलती ट्रेन में एक छोटे बच्चे का अकेला होना कितना खतरनाक हो सकता है। कोई अप्रिय घटना या बच्चा चोरी न हो जाए, इस डर से उन्होंने बिना एक पल गंवाए तुरंत इसकी सूचना ट्रेन के कंडक्टर और मुख्य टिकट निरीक्षक विजय कुमार को दी। मामला सीधे एक मासूम की सुरक्षा से जुड़ा था, इसलिए मुख्य टिकट निरीक्षक ने तुरंत पूरी चेकिंग टीम को अलर्ट कर दिया।
पूरी ट्रेन में चलाया सर्च ऑपरेशन
रेलवे स्टाफ ने तुरंत एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया। चलती ट्रेन में यह काम आसान नहीं था,क्योंकि ट्रेन लंबी थी और यात्रियों की भारी भीड़ थी। चेकिंग स्टाफ की टीम ने एक रणनीति बनाई और ट्रेन के आगे से लेकर पीछे तक के हर एक डिब्बे को खंगालना शुरू किया। स्लीपर से लेकर एसी कोच तक, हर जगह यात्रियों से पूछताछ की गई।
जनरल कोच में बदहवास मिले माता-पिता
काफी मशक्कत और गहन तलाशी के बाद, चेकिंग टीम आखिरकार ट्रेन के जनरल कोच में पहुंची। वहां उन्होंने देखा कि एक महिला और पुरुष बेहद घबराए हुए, रोते-बिलखते हुए अपने बच्चे को ढूंढ रहे थे। वे पूरी तरह बदहवास हो चुके थे। जब टीम ने उनसे बच्चे के हुलिये और कपड़ों के बारे में पूछा, तो साफ हो गया कि यह उन्हीं का बच्चा है जो भीड़-भाड़ या किसी चूक की वजह से जनरल बोगी से छूटकर D-1 कोच की तरफ चला गया था।
1 घंटा परिवार से दूर रहा बच्चा
अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली से आ रहे परिवार से बच्चा गुरदासपुर के आसपास चलती ट्रेन में बिछुड़ गया। माता-पिता रोते बिलखते उसे जनरल कोचों में ढूंढता रहा और बच्चा अपने माता-पिता को खोजता हुआ 5 कोच क्रॉस कर डी-1 कोच तक पहुंच गया। माता-पिता को पास ना पाकर बच्चा भी घबरा गया और जोर-जोर से रोने लगा। इसी दौरा रेलवे स्टाफ की नजर बच्चे पर पड़ी और उसे पठानकोट पहुंचने से पहले परिवार के सुपूर्द कर दिया गया।
आंखों में आए खुशी के आंसू
माता-पिता को ढूंढ लेने के बाद भी रेलवे स्टाफ ने पूरी जिम्मेदारी निभाई। सुरक्षा नियमों और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, स्टाफ ने पहले बच्चे के माता-पिता की पहचान से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों की जांच की और जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी कीं। जब यह पूरी तरह सुनिश्चित हो गया कि वे ही बच्चे के असली माता-पिता हैं, तब बच्चे को उन्हें सौंपा गया।
जैसे ही रोते हुए मासूम ने अपनी मां को देखा, वह उनसे लिपट गया। अपने बच्चे को सही-सलामत वापस पाकर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। माता-पिता ने कहा कि अगर आज रेलवे कर्मचारी भगवान बनकर नहीं आते, तो न जाने उनके बच्चे के साथ क्या हो जाता। उन्होंने पूरी टीम का दिल से आभार व्यक्त किया।
रेलवे प्रशासन ने थपथपाई पीठ
इस सराहनीय कार्य के बाद रेलवे के उच्च अधिकारियों ने चेकिंग स्टाफ की इस त्वरित और मानवीय कार्रवाई की प्रशंसा की है और उन्हें सम्मानित करने की बात कही है। इस विशेष सेवा भावना पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Senior DCM) उचित सिंघल ने कहा कि यह घटना हमारे जम्मू मंडल के ‘यात्री सर्वोपरि’ सेवा संकल्प का एक जीवंत और बेहतरीन उदाहरण है।
हमारे रेलवे कर्मियों को समय-समय पर ऐसी आपातकालीन या संवेदनशील स्थितियों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है। सिंघल ने कहा कि आशीष कुमार और उनकी पूरी टीम ने जो सजगता दिखाई है, उस पर पूरे रेल परिवार को गर्व है।



